परिंदे

ओ परिंदे,

यूं साखो पर बैठकर क्यों आसमान को देखता है,
पंखों को खोल,
क्योंकि ज़माना सिर्फ़ उड़ान देखता है।

तूफानों की आदत तबाही है।
तूफानों से करनी तुझे लड़ाई है।

पर याद रख तू,

परिंदे जब उड़ान में है,
तीर हर कमान में है।
आज सिर्फ तूफान नहीं तेरे सामने,
खोट हर किसी के ईमान में है।
रख खुद पर तू यकीन उद्द चल कहीं दूर,
तेरा खुलूस आज इम्तहान में है।

When you are with me the air becomes a breath.
you are my hope in the darkness,
island between a sea,

but i didnt know,
you are the one who is gasoline to my fire.
The smoke arises from my burnt heart
will fade away in the dark sky of your sorrow.

  • word_wizard ( Rishabh)

“ऐसा मेरे साथ पहली बार हुआ है”

तुमने बिना छुवे मेरे दिल को छुआ है
ऐसा मेरे साथ शायद पहली बार हुआ है।

तेरी सांसों का नशा कुछ इस तरह छाया है
ऐसा मेरे साथ शायद पहली बार हुआ है।

तेरी धड़कने तेज है और तू थोड़ा घबराया है
ऐसा मेरे साथ शायद पहली बार हुआ है।

यह तो प्यार है जो हमने शिद्दत से निभाया है
ऐसा मेरे साथ शायद पहली बार हुआ है।

हम आज भी उसी मोड़ पर है बस तू साथ नहीं आया है
ऐसा मेरे साथ शायद पहली बार हुआ है।

#word_wizard२०२०
  रिषभ मेहता

“मां का  सच्चा प्यार बाकी सब बेकार”

दुनिया में एक प्यार है जो कभी कम होता नहीं
वो रोता है पर हमें रोने देता नहीं ।

मां का  प्यार ही एक सच्चा प्यार है
बाकी दूसरे प्यार बेकार है।

जो रातो तक नहीं सो पता
तेरी गोदी में सुकून से सोता है।

जो दुनिया के सामने नहीं रो पाता
तेरे सामने दिल खोलकर रोता है।

मां वो है जो खुद के बर्थडे पर हमें गिफ्ट देती है
हमारी खुशी में खुद की खुशी ढूंढ़ती है।

मां का प्यार ही एक सच्चा प्यार है
बाकी दुनिया में  सब बेकार है।

– word wizard(Rishabh)

” हम आशियाना बना बैठे”

तुम दिल बहलाने चले थे
हम तो घर बसा बैठे।

तुम छाव ढूंढने चले थे
हम आशियाना बना बैठे।

अगर साथ रहना ही नहीं था
हल्के से कान में बोल देते।

तुम खामखां बातो का बतंगड़ बना बैठे।

– word wizard
   Rishabh mehta

  “जज्बाती तो में था”

प्यार बेशक में बयान नहीं कर पाया
पर तुझसे बेहद में करता था।

तेरी एक झलक के लिए भारी
बरसात में घंटों तक खड़ा रहता था।

पर शायद हमारी सोच अलग थी
तू प्यार समझ नहीं पाई
जो में जज़्बात में किया करता था।

जिसे बयान करना पड़े वह प्यार कहा
वो तो एक सरासर धोका था।

– word wizard

Rishabh mehta

      “दिलसे”

दिल से टाइप करें कविता यूहीं बन जाएगी।

दिल से प्यार करें ज़िन्दगी बदल जाएगी।

पर आप तो दिमाग वाले निकले।

क्या पता था तू ऐसे चली जाएगी।

– word wizard (Rishabh)

भूल से भूल गए उने भूलना

भूल से भूल गए उसे भूलना
यादों ने याद दिला दिया।।

लफ्ज़ नई थे हमारे इश्क़ के
ख़ामोशी से दीदार करा दिया।।

कुछ कहना था बाकी उनसे
हमने कमबख्त वक़्त गवा दिया।।

हमे मोहबत मिले ना मिले
उने हमने इबादत बना दिया।।
– वर्ड विजार्ड (रिषभ)